Momin Ansar Sabha

स्थापना वर्ष 2010

ऑल इण्डिया मोमिन अन्सार सभा का मक़सद सर्वहारा इन्सानों को उनके तमद्दुनी (सांस्कृतिक) अमली(व्यवहारिक) इक्तिसादी(अर्थव्यवस्था) समाजी, सियासी और मआशी , तालीम ओ तरबियत,इस्लाह दुरुस्तगी, अरतका खुशहाली तरक़्क़ी व सरबुलन्दी के ऐसे असबाब ओ ज़राए मुहैया कराना है जिससे ज़रूरतमंद सर्वहारा समाज की वह बिरादरियां जो मुल्क़ के फलित वर्गों से बहुत पीछे रह गईं या रखी गईं हैं अब बाइज़्ज़त मसावयान (बराबरी) शिरक़त के साथ ज़िन्दिगी गुज़ार सकें।

मोमिन अन्सार सभा का मानना है कि हमारी पस्तगी की वजह हमारा मुनज़्ज़म न होना है। जिस खिला को दूर करने के लिए मोमिन अन्सार सभा के बानी व क़ौमी सदर जनाब मो अकरम अन्सारी साहब व उनके मुख्लिस दानिश्वरोँ बेलौस सामाजिक खिदमतगारों की काविशों से महरूमों को उनका हक दिखाने के लिए ऑल इण्डिया मोमिन अन्सार सभा का प्लेटफार्म मुहैया किया जो उत्तर प्रदेश से मरकज़ी किरदार निभाते हुए मुल्क़ के 15 सूबों में अपनी खिदमात अंजाम दे रहा है।

ऑल इण्डिया मोमिन अन्सार सभा की तशकील मुल्क़ की बड़ी आबादी बिरादरी मोमिन अन्सार ने की है हमारा संगठन मज़हब ज़ात से ऊपर उठ कर सारे इन्सानों को उनके जाएज़ हुक़ूक़ दिलाने के लिए कोशां है मुसलसल दस सालों में संगठन का काम करने का बेनज़ीर अंदाज़ अवाम को मुतवज्जो करता रहा है।

उद्देश्य

भारत के बुनकर हस्तशिल्पियों कामगारों की सामाजिक शैक्षिक आर्थिक स्तिथि जो विभिन्न आयोगों रिपोर्टों अनुसार दलितों से भी बदतर जीवन यापन करने पर मजबूर है जो भारत के मुस्लिम समाज की कुल जनसंख्या का 85 प्रतिशत है इस समाज की सामाजिक आर्थिक शैक्षिक स्तिथि को बेहतर बनाने के लिए मोमिन अन्सार सभा का गठन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो अकरम अन्सारी ने वर्ष 2010 में किया गया जिसका कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण भारत है ।

कार्य

बुनकरों हस्तशिल्पियों मोमिन अन्सार समाज व कामगार समाज के उत्थान के लिए मोमिन अन्सार सभा ने बच्चों की शिक्षा के लिए ज़कात फाउंडेशन फॉर लिटरेसी प्रकोष्ठ का गठन किया जिसमें गरीब बेसहारा बच्चों की शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप देने का कार्य विगत कई वर्षों से किया जा रहा है सैंकड़ों की संख्या में छात्र लाभान्वित हुए। केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा संचालित योजनाओं को पात्र नागरिकों तक पहुचाने तथा योजनाओं को लागू करने में आ रही समस्याओं के निवारण के लिए ज्ञापन ,प्रदर्शन व आंदोलन किये गए जिससे योजनाओं को संचालित करने वाली सरकारी संस्थाओं द्वारा त्रुटियों को दूर कर आसान बना कर बुनकरों दस्तकारों कामगारों तक लाभ पहुचाया गया। किये गए कार्यों की के सन्दर्भ में केंद्र व प्रदेश सरकारों प्रशासनिक अधिमारियों को दिए गए ज्ञापन /मांग पत्र /आंदोलन की फोटो व प्रति संलग्न है।

आगामी उद्देश्य

देश भर में बुनकरों हस्तशिल्पियों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या उनके शैक्षिक स्तर का बेहतर न होना ही है जिसकी वजह से वह अपने उत्पाद का वाजिब मूल्य नहीं पाता और बिचौलियों के चुंगल में फंसा है जिसे आज़ाद करने के लिए मोमिन अन्सार सभा का आगामी उद्देश्य देश में ऐसे शिक्षण संस्थानों की स्थापना करना है जहाँ बुनकर हस्तशिल्पी कामगार के बच्चो को उनके उत्पाद के अनुसार शिक्षा व परीक्षण दिया जाये जिससे वह अपने पैतृक उत्पादन की बेहतर क्वालिटी पैकिंग मार्केटिंग सक्षम व सुचारू रूप से कर सके । मुख्य धारा में रहकर देश की तरक्की में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकें।

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जमीं की प्यास बुझाने को बेकरार हूं मैं!
हिसार-ए-संग से निकला हूं आबशार हूं मैं।


अपने शैक्षिक सफर के दौरान ही मोमिन अन्सार सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद अकरम अन्सारी के दिल में हमदर्दी, वरूणा और जनसेवा की भावना हमेशा से रही है। आप अपने मोहल्ले की तमाम अवामी परेशानियों और दिक्कतों को दूर कराने के लिए सदा सक्रिय रहे हैं और समाज की सेवा करते हुए व्यापार मंडल के सहायक संयुक्त सचिव के पद तक पहुंचने की यात्रा के दौरान अपने विभिन्न चरणों में मुस्लिम समाज की परेशानियों से रू-ब-रू हुए। इस दशा को देखते हुए उन्होंने खुदा पर यकीन रखते हुए समाज की बदहाली दूर करने और मुस्लिम समुदाय के कल्याण और विकास के लिए अपनी जिन्दगी को वक्फ करने का अहद कर लिया। इस सिलसिले में इमाम-ए-मस्जिद की बेगुनाह गिरफ्तारी हो या मुस्लिम व्यापारी को बंद किए जाने का मामला हो या समाज के दबे कुचले और पिछड़े लोगों को उनके जायज कानूनी अधिकार दिलाने की बात हो मो. अकरम अन्सारी हर महाज पर जुल्म व नाइंसाफी और भ्रष्टाचार के खिलाफ फौलादी हौंसलों और दृढ़ विश्वास के साथ सीना सिपर हुए। चुनांचे आपने बेगुनाहों को कानूनी तौर पर बरी कराते हुए समाज में उनका भव्य स्वागत किया और उनकी दिल जोई का सम्मान भी किया। मजलूमों को इन्साफ दिलाने, महरूमों को उनका हक दिलाने और मुस्लिम समाज के कल्याण एवं विकास का कार्य करने के कारण साम्प्रदायिक सोच रखने वालों ने मो. अकरम अन्सारी को फर्जी मुकदमों में फंसाकर आपकी राह में रूकावटें खड़ी करने की कोशिशें कीं ताकि आप अपना यह नेक और सकारात्मक मिशन बंद कर दें मगर सेकुलर मिजाज लोगों ने आपके कामों की सराहना और आपके मिशन की ताईद भी की। इससे प्रेरित होकर मो. अकरम अन्सारी दोगुनी शक्ति और ऊर्जा एवं जवान हौसले के साथ अपने नेक मिशन को आगे बढ़ाने और मुस्लिम एवं पिछड़े समाज के लोगों की सच्ची सेवा के लिए आज भी तन मन धन से सक्रिय हैं। बकौल शायर-

हमारा दिल बहुत टूटा है लेकिन
हमारा हौसला टूटा नहीं है।


हिन्दुस्तान में आजादी के बाद हर स्तर पर मुस्लिम कौम दयनीय हालत से दो-चार हुई। शैक्षिक, आर्थिक एवं सामाजिक महाज पर निरंतर महरूमियां, नाकामियां और पिछड़ापन उसका मुकद्दर बनता गया। उत्तर प्रदेश में 5 करोड़ मुस्लिम समाज के लोगों में ढाई करोड़ व्यक्ति अन्सारी समाज से सम्बन्धित हैं जो अपनी आर्थिक एवं सामाजिक समस्याओं के हल के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य एवं व्यापार से जुड़े हैं लेकिन उनमें 45 लाख अफराद बुनकर के पेशे से जुड़े हैं इनके सामने समस्याओं का एक लम्बा सिलसिला है साथ ही सरकार की ओर से इनके हित में चलाई जा रही कल्याणकारी एवं फलाही योजनाओं का लाभ इन्हें न मिल पाने के कारण इनकी दशा और भी गिरती जा रही है। हरचंद की शिक्षा विकास की कुंजी है लेकिन अगर किसी परिवार या समुदाय या समाज के सामने रोटी रोजी का ही मसला गंभीर रूप से मुंह खोले खड़ा हो तो वह अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की ओर कैसे ध्यान दे सकता है। जब तक उनकी आर्थिक एवं सामाजिक समस्याएं हल न होंगी वह विकास के पथ पर कैसे चल सकते हैं। ऐसी सूरत-हाल को देखते हुए आम तौर से मुस्लिम समाज और विशेष तौर पर मोमिन अन्सारी समाज को उनके संवैधानिक व लोकतान्त्रिक अधिकार दिलाने एवं उनका जीवन स्तर बेहतर बनाने और समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से कौम के नवजवानों ने धर्मगुरूओं, बुद्धिजीवियों तथा कल्याणकारी व समाजी क्षेत्रों से जुड़े सम्मानित लोगों से विचार-विमर्श करके कौम के सच्चे और निष्ठावान नवयुवक मो. अकरम अन्सारी के नेतृत्व में मोमिन अन्सार सभा की बुनियाद डाली, जिसमें हिन्दुस्तानी समाज के पिछड़े वर्ग के साथ- साथ हिन्दुस्तानी समाज के सेक्यूलर मिजाज के लोगों को भी जोड़ा गया और उन्हें मोमिन अन्सार सभा के कन्धे से कन्धा मिलाकर संवैधानिक व लोकतान्त्रिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए जद्दोजहद करने की दावत दी गई। मोमिन अन्सार सभा की दावत और नियंत्रण को मुल्क और कौम के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत प्रभावशाली व्यक्तियों ने कुबूल भी किया और इसमें हर प्रकार की एवं हर स्तर पर अपना योगदान देने की भी बात कही।

मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर
लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।


चुनांचे माह अगस्त 2010 में बाकायदा मोमिन अन्सार सभा का गठन किया गया और इसकी पहली कांफ्रेन्स उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के होटल “मेरा मन” में सम्पन्न हुई, जिसमें मुल्की एवं सुबाई स्तर पर विभिन्न जिलों के प्रतिष्ठित लोगों ने शिरकत की। इस सम्मेलन में यह बात उभर कर सामने आई कि प्रदेश के 45 लाख बुनकरों की हालत दयनीय और काबिले रहम इसलिए है क्योंकि उनकी आमदनी का अनुपात (तनासुब) महंगाई के मुकाबले 8 गुना कम है और सरकार द्वारा चलाई जा रही बुनकर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पाता। यह भी घोषणा की गई कि मोमिन अन्सार सभा एक गैर राजनीतिक संगठन है। सभा से जुड़ा कोई भी व्यक्ति इसका राजनीतिक इस्तेमाल नहीं कर सकता और किसी भी पार्टी का कोई भी व्यक्ति जो मोमिन अन्सार सभा की पालीसियां और विचारों से सहमत हो व मोमिन अन्सार सभा से जुड़कर समाज की भलाई के कार्यों में हिस्सा ले सकता है। मोमिन अन्सार सभा पूरी अन्सारी समाज को एक धागे में पिरोकर सभी मुस्लिम जात और ब्रादरियों एवं अन्य धर्मों के मानने वालों से सकारात्मक बिन्दुओं पर एक-दूसरे से आपसी योगदान करते हुए मोमिम अन्सार समाज को सामाजिक एवं संवैधानिक अधिकार दिलाने व उनकी तरक्की की राहों को हमवार करने के लिए दृढ़ संकल्प है। केन्द्रीय/प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी स्कीमों से उन्हें परिचित कराना तथा उनके लाभ उक तक पूरी तरह पहुंचाने की सार्थक जद्दोजहद करना है। इस सिलसिले में जिलावार कमेटियों का गठन भी किया गया जो अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा करके अपनी रिपोर्ट सदर दफ्तर को देंगी जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही को प्रभावशाली और लाभदायक बनाया जा सके।